शनिवार, 18 जून 2022

भावों पर वर्ण पिरामिड

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                          वर्ण पिरामिड 
                 वेदना/दुःख/दर्द/पीड़ा ।

(1)

माँ
बूढ़ी
वेदना
उपेक्षित
टूटा आधार
छाया बनी धूप
स्मृतियों का संसार

(2)

हैं
दर्द
ममता
प्रतिफल
धुँधली आँखे
जोहती है बाट
रोती है टूटी खाट 

 


                          " चरण"

(1)
हे
मेरे
चरण
ठहरना
कुपंथ पर
निडरता संग
चल सच की राह 

(2)

हो
जहाँ
कठिन
दुराचार
कर प्रकाश
मिटाना समूल
गड़े क्यों न शूल 

 
                             ।खेल।

(1)

ये
खेल
प्रपंच
षड्यंत्र
खेलते क्रूर
नर ही नर से
अभिमान मे चूर 

(2)

है
हम
खिलाड़ी
पराजित
जीवन मेल
पावन सौहार्द
खेलें प्रेम के खेल 



                 वर्ण पिरामिड "श्रमिक"

(1)

हैं
क्यों
कोमल
नौनिहाल
क्षुधित मुख
भूखे बेकसूर
खानों में मजदूर 

(2)

हो
बन्द
किशोर
मजदूरी
करें पहल
भारत महान
तो निकलेगा हल 


               वर्ण पिरामिड।गंगाजल।

1

हे
कण
अमृत
भगीरथ
अनुपालक
फलित संसार
प्राणिमात्र उद्धार

2

है
शुधा
पावन
गंगाजल
पाप नाशक
रोग विनाशक
एकाकी मोक्ष द्वार 


            वर्ण पिरामिड।सोना/कनक।

1-

है
धातु
कनक
आभूषण
मृदा सदृश्य
राजशाही ठाट
समाज को दे बाट 

2-

धो
देता
धतूरा
आचरण
बिका इंसान
खरीदता शान
सहता अपमान 



         वर्ण पिरामिड।सैनिक।सिपाही जवान।

1

हो
जय
जवान
अभिमान
है तुम पर
देश को भरोसा
सम्पूर्ण हिंदुस्तान 

2

है
तुम्हे
शहीद
समर्पित
कोटि प्रणाम
गाये तेरा ज्ञान
जीवन बलिदान

3

हे
देश
प्रहरी
वीर पुत्र
भारतमाता
रज चरणों में
लिखी जीवनगाथा

4

तू
सच
सपूत
देशभक्त
सच्चा सेवक
ध्रुव सा सितारा
देश ऋणी तुम्हारा 

5

हो
नही
सैनिक
कर्णधार
जन रक्षक
देश का आधार
यीशु का अवतार


                     पिरामिड।नया वर्ष ।
1

हो
शुभ
सुंदर
आशावान
मंगलकारी
बरसाये हर्ष
आपका नया वर्ष 

2

यें
चाँद
सितारे
वशुन्धरा
मेघ, गगन 
बरसाये प्यार
तृप्त हो तन, मन

3

वो
दुःख
सन्देह
प्रतिशोध
बने पावन
हृदय भण्डार
सरस व्यवहार 

4

दें
नये
विचार
नयी सोच
प्रत्येक दिन
हौसलों के पंख
उद्देश्य निष्कलंक

5

दें
भर
भावना
सम्बन्ध में
सुबह शाम
उर हो प्रेरित
इक नया आयाम

6


               पिरामिड। वक्त की चाल

1

है
रिश्ता
शरीर
संवाहक
और प्राण का
जन अधिकार
सृष्टि का उपहार

2

ये
नाँव
शरीर
भौतिकता
सागर मध्य
नाविक है कर्म
निश्चित दूरी धर्म

3

तो
कल
जीवन
ढलेगा ही
वक्त की चाल
कर्त्तव्यों के प्रति
रहो दृढ़ संचेत  


          वर्ण पिरामिड। ठण्ड के प्रति।

1

ये
सर्द
हवाएँ
कंपकपी
कंक शरीर
ले ठण्डी सी आह
कल ही मरा गरीब

2

दो
दिन
के बाद
फिर कैसे ?
क्यों खिली धूप?
विजयी सूरज
या पराजित मृत्य 

                       पिरामिड।ईद।
1

हो
ईद
उन्हें भी
मुबारक़
संघर्षशील
शुभ कामनाये
जीते क्षुधा छिपाये ।

2

जो
देखें
भविष्य
का दर्पण
ईद का चाँद
आँसुओ का पर्दा
पलको की ओट से 



          पिरामिड।स्वच्छता के प्रति ।

1-

हो
मन
निर्मल
मानवता
समाजिकता
धोये कलुषता
सत्यता के जल में 

2-

हे
ढोंगी
मनुज
सदगुण
स्वच्छता प्रति
धो लो कलुषित
मटमैले मन को 


        वर्ण पिरामिड। शिक्षा के प्रति ।

1-

ये
शिक्षा
प्रसार
निराधार
बेरोजगार
ठेका का बाजार
मचता हाहाकार

2-

है
शिक्षा
अनार
सौ बीमार
बन्द दुकानें
चीखता शिक्षित
माँगता है लिखित

                
    वर्ण पिरामिड।किसान के प्रति

1-

जौ
गेहूँ
किसान
गरीबता
एक प्रतीक
भारत की शान
पुराना मेहमान

2-

पौ
फूटे
उजाला
भरे पेट
नही किसान
बनेगीं कहानी
सुनेंगी तब नानी

3-

सौ
दिन
अढ़ाई
कोस चले
तपे गरीब
जीती है शान
निर्मम इंसान 


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varnpiramid by Rakmish Sultanpuri
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