शनिवार, 18 जून 2022

शब्द आधारित वर्ण पिरामिड

===============पिरामिड===============

            मन_ पर पिरामिड 

              (1)

               हे
              मन
            निर्भय
           बढ़  चल
          कर्तव्य पथ
      लक्ष्य को सन्धान
      जीवन   रेगिस्तान

               (2)

               हो
              मत
            विरक्त
          धूप दुःख
       कर्म की छाया
       बढ़ती     सघन
     प्रतिबिम्बित   तन 


          देवता शब्द पर पिरामिड

1

हे
देव
गणेश
दयावन्त
जीवन त्रास
मिटाओ अंधेरा
दो मुझको विश्वास

2

दो
दान
महान
भौतिकता
बन्धन   टूटे
आस्था हो प्रबल
उपजाओ  सम्बल 

3

दे
फूल
माँगता
अनुचर
चरण धूल
निर्वेद निस्वार्थ
जीवन हो कृतार्थ 

4

हो
शांति
मन मे
जीवन मे
विनती करूँ
उतारूँ आरति
सुमति आह्वाहन 

5

लो
कर
स्वीकार
आया द्वार
प्रार्थना दास
समर्पण धन
कुमकुम चन्दन 


             पिरामिड   "घन"

1-

हे
घन
बरसो
घनघोर
झूमे पवन
हर्षित हो मन
आह्लादित वसुधा

2-

वो
गर्मी
उमस
ठंड भरी
सर्द  हवाएं 
रुक गयी शांत
सहमी   है   धूप 
वर्षा  के  अनुरूप 


                 " प्रेम"

1

ये
प्रेम
प्रतीक
पावनता
कोरा हृदय
अटल विश्वास
मन मात्र प्रयास

2

हो
पूर्ण
लालसा
चंचलता
भरे  उड़ान
स्मृतियों के पार
भृमर   ढूढ़े  प्यार 

   


                       " मानवता"
(1)

है
धूल
जीवन
मानवता
निजता धर्म
सुखद हो कर्म 
जीवन सँवरता

(2)

दो
चार
दिवस
पहचान
बचेगा ख़ाक
न डींगे ही हाँक
बन सच्चा इंसान 



                            "देश"

1-

हे
देश
भारत
उठ जागो
बनो महान
तिरंगे की शान
गूँजे यश सम्मान 

2-

हो
दृढ़
प्रत्येक
नागरिक
भरे संकल्प
करे सहयोग
नवल कायाकल्प 

                      " देव"

(1)

सौ
बार
नमन
संहारक
प्रजापालक
जग निर्माणक
ब्रम्हा विष्णु महेश

(2)

हे
देव
सैकड़ो
प्रतिरूप
दुःखद रूप 
पतंग  संसार 
कर दो बेड़ा पार 

                           "समय।काल"

(1)

है
काल
अबाध
द्रुतगामी
एक फर्लांग
जीवन ले माप
श्रेष्ठ अपने आप 

(2)

लो
देख
समय
जाता चला
खोलता पंख
जीवन की आँखे
तांकती है खरोंखे

                       
                        "पतझड़"


(1)

ये
गेहूँ
सरसो
अरहर
कीट पतंग
जीवन के चित्र
खुशहाली के रंग

(2)

दे
शाम
सुबह
पतझङ
उर उमंग
भरती प्रकृति
खुशियां सबरंग

             






          "कोमल,मृदु ,मुलायम"


(1)
हे
माया
बावरी
मुलायम
भौतिकवादी
निरन्तर मान
बस जाति प्रधान 

(1)

हो
नीति
अटल
सुकोमल
प्रजा रक्षक
निजता से दूर
देश प्रेम में चूर  


                  "महक / सुगन्ध / खुशब"

(1)

हे
देव
महके
अबिराम
देश की शान
आँगन संसार
भारत हो महान

(2)

हे
देश
प्रणाम
न्योछावर
अर्पित तन
सुगन्धित धरा
फैलती परम्परा 

       रचित by  Rakmish Sultanpuri 
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